Dhanak Caste Status Shayari For Bike

आज इस पोस्ट में आपको मिलेंगे 30 से ज्यादा Dhanak  Attitude Status For Whatsapp Facebook. आजकल हर कोई अपनी अकड़ में जीना चाहता है. ऐसे में धानक भला किसी से पीछे रह सकते हैं. Dhanak या Dhanuk वो धनुर्धारी होते थे जिनका तीरंदाजी  मुकाबला कोई नहीं कर पाता था. इनके बारे में ज्यादा जानकारी के लिए आप यहाँ क्लिक करके ले सकते हैं.


इस पोस्ट में आपकको Dhanak  Caste Status के आलावा Dhanak Status Photo भी मिलेंगे. जिन्हें आप अपने Whatsapp या Facebook की Profile Dp पर लगा सकते हैं. धानक पिछड़े वर्ग से सम्बन्ध रखते हैं. लेकिन धीरे धीरे ये अपने परिश्रम के दम पर बहुत आगे बढ़ रहें हैं. 

Dhanak Status Photo

Dhanak हूँ हड्डी तोड़ दूंगा, पर दिल नहीं. 

दुनिया टाईम पे चाल्ला, और Dhanak अपनी जिद पे.

इतिहास भी गवाह है. Dhanak का नाम ही हवा है.

पैसे का नी, Dhanak होने का घमंड स.

Dhanak के ठिकाने, तू क्या तेरा बाप भी ना जाने.

Dhanak Shayari Hindi For Bike

Dhanak क्यूट नी, Kasoot होया करें.

Dhanak नाम ही काफी है.

Dhanak की दोस्ती पे कदी शक ना करिये.

देसी नार और Dhanak जैसा यार, किस्मत आले ने मिल्या  करे. 

स्मार्ट सूं,
सिंगल सूं,
उपर ते Dhanak हूं,
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और बता की चाहिये.

Dhanak status image

रडक और भड़क, Dhanak दोनों काढ देगा.

मगरमच्छ की पकड़, और Dhanak अकड़ ठाडी होया करे.

Dhanak की यारी लागे, दुनिया ने प्यारी बेटा.

जिन काम्मा पे #Sarkari बैन, Dhanak उन्ही का स फैन.

दिल ते भोला, आर दिमाग में रोला, यो ही Dhanak की पहचान स.

Dhanak  Status for Bike Number Plate

चौधर का हुक्का स, और Dhanak का रुक्का स

Dhanak Date पे नहीं, तारीख पर जाते हैं.

रै बावली Dhanak सिर्फ एक मौका दिया करे.

Dhanak सिर्फ नाम नहीं, एक Brand है.

दोस्तों अगर आपके पास भी Dhanak Samaj से जुडी कोई जानकारी या कोई Dhanak Status और शायरी हो तो आप नीचे कमेन्ट में शेयर जरुर करें. ताकी हम आगे के पोस्ट में वो जानकारी भी लोगों तक पहुंचा सके. आप हमें Mail करके भी जानकारी दे सकते हैं. हमारा Mail Address आपको हमारे Contact Page पर मिल जायेगा. 

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1 Comments

  1. माना जाता है की धानक या धनुक’ संस्कृत शब्द ‘धनुषकः‘ से लिया गया है जिसका अर्थ है
    (Dhanak) धनुषधारी. ये वो सिपाही होते थे जो युद्दों में भाग लेते थे. और सबसे आगे की पंक्तीं में खड़े होने का गौरव प्राप्त करते थे. सबसे पहले दुश्मन पर वार करने का अधिकार धानुक(dhanak) को ही दिया जाता था. क्योंकी इनकी धनुरधारी अन्य सभी जातियों से श्रेष्ठ मानी जाती थी.

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